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कà¥à¤¯à¤¾ होती है ओवेरियन सिसà¥à¤Ÿ-जिस पà¥à¤°à¤•ार गांठतरल पदारà¥à¤¥ से à¤à¤°à¥€ à¤à¤• थैलीनà¥à¤®à¤¾ आकृति होती है, उसी के समान अंडाशय में विकसित होने वाली गांठà¤à¥€ तरल से à¤à¤°à¥€ à¤à¤• थैली होती है जो आपके दोनों में से à¤à¤• या दोनों अंडाशयों में विकसित होती है। राजमा के आकार में बने आपके दोनों अंडाशय, शरीर के वे अंग होते है जिनमें गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में पहà¥à¤à¤šà¤¨à¥‡ से पूरà¥à¤µ, आपके अंडे संगà¥à¤°à¤¹à¥€à¤¤ रहते हैं और जिससे उसमें पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ उरà¥à¤µà¤°à¤¤à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है। ये गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की दोनों ओर पेट के नीचे के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ होते हैं। महिलाओं के शरीर में ये दोनों अंडाशय, अंडे के साथ à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ और पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ नामक हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ की रचना करते हैं।
ओवेरियन सिसà¥à¤Ÿ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ अंडाशय में गांठहोने का सरल अरà¥à¤¥- ओवरी à¤à¤• तरल पदारà¥à¤¥ से à¤à¤°à¥€ थैली होती है जबकि सिसà¥à¤Ÿ का मतलब गांठहोता है। जब तक सिसà¥à¤Ÿ या गांठà¤à¤• बड़ा आकार ना ले लें, तब तक अंडाशय में गांठबनने के कोई विदित लकà¥à¤·à¤£ दिखाई नहीं देते हैं।
ओवरियन सिसà¥à¤Ÿ के लकà¥à¤·à¤£-
ओवरियन सिसà¥à¤Ÿ या अंडाशय में गांठमहिला के षरीर में कà¥à¤› हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से लेकर कई महीनों तक à¤à¥€ बनी रह सकती है और सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ही बà¥à¤¤à¥€ चली जा सकती है। इस बात की à¤à¥€ अधिकतम संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ होती है कि शायद आप अपने अंडाशय में उपज रही गांठसे बिलà¥à¤•à¥à¤² अवगत नहीं हो। लेकिन कई बार इसके विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ ल़कà¥à¤·à¤£ महिलाओं का शरीर महसूस करता है। ओवरियन सिसà¥à¤Ÿ के लकà¥à¤·à¤£ निमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित हैः
->कमर का आकार बà¥à¤¨à¤¾
->पेट अथवा शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ में दरà¥à¤¦
->कम à¤à¥‚ख लगना
->पेट में अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• फà¥à¤²à¤¾à¤µà¤Ÿ या सूजन
->बार-बार पेशाब आना
->मलाशय या मूतà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¯ पर दबाव
->मलतà¥à¤¯à¤¾à¤— में असहजता व अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• दरà¥à¤¦
->संà¤à¥‹à¤— के दौरान अधिक दरà¥à¤¦ होना
ओवरियन सिसà¥à¤Ÿ के कारण और ज़रूरी पà¥à¤°à¤•ार-
à¤à¤• कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• (फंकà¥à¤¶à¤¨à¤²) आवेरियन गांठजो à¤à¤• महिला के अंदर गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान पाई जाती है, वह आमतौर पर आपके या आपके बचà¥à¤šà¥‡ के लिठकोई परेशानी नहीं पैदा करती है। कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• ओवेरियन सिसà¥à¤Ÿ दो पà¥à¤°à¤•ार की होती है- फॉलिकà¥à¤¯à¥à¤²à¤° सिसà¥à¤Ÿ और लà¥à¤¯à¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤® सिसà¥à¤Ÿà¥¤
ओवेरियन सिसà¥à¤Ÿ के कारण और ज़रूर पà¥à¤°à¤•ार निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित है-
1 फॉलिकà¥à¤²à¤° सिसà¥à¤Ÿ- महिलाओं में मासिक धरà¥à¤® के दौरान तरल पदारà¥à¤¥ यà¥à¤•à¥à¤¤ थैलीनà¥à¤®à¤¾ आकृति अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ ओवरी में उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने वाले अंडों को फॉलिकल कहा जाता है। अमूमन हर माह ये थैली फट जाती है और अंडे इससे बाहर निकल जाते हैं लेकिन जब यह थैली फटने में असमरà¥à¤¥ रहती है, उस समय अंडाशय में मौजूद तरल पदारà¥à¤¥ सिसà¥à¤Ÿ या गांठका रूप ले लेता है।
2 कॉपरà¥à¤¸ लà¥à¤¯à¥‚टियम सिसà¥à¤Ÿ-
ये सिसà¥à¤Ÿ आमतौर पर फॉलिकल निकलने के बाद सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ही नशà¥à¤Ÿ हो जाते हैं, किंतॠकिसी कारण यदि ये नशà¥à¤Ÿ नहीं हो पाते हैं तो इसमें जगह से अधिक तरल à¤à¤•तà¥à¤°à¤¿à¤¤ हो जाता है जो कॉपरà¥à¤¸ लà¥à¤¯à¥‚टियम सिसà¥à¤Ÿ में तबà¥à¤¦à¥€à¤² होने का कारण बन जाता है।
3 पॉलिसिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ओवरी सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®-
महिलाओं में पॉलिसिसà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ओवरी सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® या पीसीओà¤à¤¸ à¤à¤• सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾ है, जिसके लिठमहिलाओं को सावाधनीपूरà¥à¤µà¤• मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन, उचित उपचार और समय पर हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª की अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• ज़रूरत होती है। सही समय पर उपचार न होने पर पीसोओà¤à¤¸ गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ महिलाओं को अनà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं जैसे उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª, उचà¥à¤š कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤², चिंता और अवसाद, दिल का दौरा आदि बीमारियों का सामना à¤à¥€ करना पड़ सकता है।
इससे ओवरी के à¤à¥€à¤¤à¤° कई छोटी-छोटी गांठे या सिसà¥à¤Ÿ पैदा हो जाते है जिसके बà¥à¤¨à¥‡ पर महिलाओं को बांà¤à¤ªà¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ का सामना à¤à¥€ करना पड़ सकता है।
ओवरियन सिसà¥à¤Ÿ (अंडाशय में गांठ) के उपचार-
ओवेरियन सिसà¥à¤Ÿ या अंडाशय में गांठों के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ उपचार है। हालांकि, इनका उपचार इस बात पर निरà¥à¤à¤° करता है कि ये गांठे शरीर के लिठकितनी और किस रूप में हानिकारक है या कितनी सौमà¥à¤¯ हैं और कहां से विकसित हà¥à¤ˆ हैं। यदि ये गांठे सौमà¥à¤¯ है तो कई बार ये सà¥à¤µà¤¯à¤‚ ही खतà¥à¤® हो जाती है किंतॠयदि ये गांठे हानिकारक है तो इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तà¥à¤°à¤‚त इलाज की ज़रूरत होती है।
यदि आपके अंडाशय में गांठहोगी तो आपके रूटीन अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड सà¥à¤•ैन में ज़रूर दिखाई देगी। लेकिन यदि आप उपरोकà¥à¤¤ किसी à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ का सामना कर रहीं हैं तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से à¤à¤• बार इस संदरà¥à¤ में ज़रूर परामरà¥à¤· लें। उनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में सिसà¥à¤Ÿ पर नज़र रखने के लिठअतिरिकà¥à¤¤ सà¥à¤•ैन कर गांठकी पà¥à¤¶à¥à¤Ÿà¤¿ करवाई जा सकती है।
à¤à¤• साधारण गांठआमतौर पर आपके गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पर असर नहीं डालती मगर यदि सिसà¥à¤Ÿ अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—रà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ असà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¤à¤¾ (à¤à¤‚डोमेटà¥à¤°à¤¿à¤“सिस) या बहà¥à¤ªà¥à¤Ÿà¥€à¤¯ डिमà¥à¤¬à¤¾à¤·à¤¯à¥€ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (पोलिसिसà¥à¤Ÿà¤¿ ओवेरियन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®) की वजह से हो तो गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ में जटिलताà¤à¤‚ पैदा हो सकती हैं।
 20 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ की गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के बाद ही ऑपरेषन-
यदि आपका ओवेरियन सिसà¥à¤Ÿ लगातार बॠरहा है और इसके कारण आप बहà¥à¤¤ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दरà¥à¤¦ का सामना कर रहीं हैं तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° इसे ऑपरेशन के माधà¥à¤¯à¤® से हटाने की सलाह à¤à¥€ दे सकते हैं। हालांकि महिला के शरीर से गांठनिकालने के लिठऑपरेशन केवल 20 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ की गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के बाद ही किया जा सकता है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ही सिसà¥à¤Ÿ हटाने का ऑपरेशन करने के कारण गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ व खतरा बॠसकता है।
 किसी à¤à¥€ चरण में अंडाशय को कà¥à¤·à¤¤à¤¿ से बचाना-
कई गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं में गांठअंडाशय के सà¥à¤Ÿà¥‡à¤® में विकसित हो जाती है और टेà¥à¤¾-मेà¥à¤¾ आकार ले लेती है। à¤à¤¸à¥‡ पà¥à¤°à¤•रण में, गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला बहà¥à¤¤ अधिक बीमार हो सकती है और उसके अंडाशय को कà¥à¤·à¤¤à¤¿ à¤à¥€ पहà¥à¤à¤š सकती है। यदि à¤à¤¸à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ हो जाती है तो गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला चाहे किसी à¤à¥€ चरण में कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ ना हो, डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ऑपरेशन कर इस गांठको निकालना ज़रूरी हो जाता है।
 लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी सरà¥à¤œà¤°à¥€-
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में की होल सरà¥à¤œà¤°à¥€ अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ लैपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ॉपी सरà¥à¤œà¤°à¥€ के जरिये गांठको बाहर निकाला जा सकता है। यह सरà¥à¤œà¤°à¥€ तब करवाई जाती है जब आपकी गांठछोटी हो। इस थैरेपी में डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नाà¤à¤¿ के पास à¤à¤• छोटा सा चीरा लगाया जाता है, जिसके पषà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ गांठअरà¥à¤¥à¤¾à¤¤à¥ सिसà¥à¤Ÿ को बाहर निकाला जाता है।
 लेपरोटॉमी सरà¥à¤œà¤°à¥€-
यदि आपकी सिसà¥à¤Ÿ साधारण होने के विपरित बड़ी है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उसे इस सरà¥à¤œà¤°à¥€ के माधà¥à¤¯à¤® से नाà¤à¤¿ के पास à¤à¤• बà¥à¤¾ चीरा लगाकर बाहर निकाल दिया जाता है। यदि सिसà¥à¤Ÿ के चलते गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ या अंडाशय में कैंसर फैलने का खतरा हो तो डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ और अंडाशय की सरà¥à¤œà¤°à¥€ कर इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ निकाल दिया जाता है। उपरोकà¥à¤¤ सà¤à¥€ ओवरियन सिसà¥à¤Ÿ के उपचार है।
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